जानें क्या गुस्से में जोर से चिल्लाकर सेहत बिगाड़ रहे हैं आप ?

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कई बार चिढ़ने, गुस्से या जोश में आकर जोर से बोलने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता हैै। नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद ही परख लीजिए कि कहीं आप भी अकारण तो नहीं गरजते!

1. आपको लगता है कि केवल उन्हीं लोगों की बात सुनी जाती है जो जोर से बोलते हैं !
अ: सहमत

ब: असहमत

2. अपने अनुभवों से आपको यकीन है कि चुप रहने वाले लोग अक्सर नुकसान में रहते हैं !
अ: सहमत

ब: असहमत

3. मेरी जोर से बोलने की आदत बचपन से ही है और अब इसे बदलना मुश्किल है !
अ: सहमत

ब: असहमत

4. मेरे परिवार में सब जोर-जोर से बोलते हैं तो मुझे भी तो वैसा ही करना पड़ेगा !
अ: सहमत

ब: असहमत

5. मुझे नहीं लगता कि जोर से या चिल्लाकर बोलने का सेहत पर कोई बड़ा नुकसान होता है !
अ: सहमत

ब: असहमत

6. मैं केवल तभी गरजता/गरजती हूं जब स्थिति बेहद बिगड़ जाती है, अन्यथा नहीं !
अ: सहमत

ब: असहमत

7. मेरे सहकर्मी ऐसे हैं कि जो मधुरता या चुप्पी की भाषा समझते नहीं, इसलिए मेरी आदत भी पड़ गई!
अ: सहमत

ब: असहमत

8. मैंने अकारण चिल्लाने के बुरे प्रभाव देखे और भोगे भी हैं, लेकिन मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है !
अ: सहमत

ब: असहमत

9. मैं आगे से कोशिश करुंगी/करूंगा कि सामान्य व्यवहार में वाणी का संयम बनाए रखूं !
अ: सहमत

ब: असहमत

स्कोर और एनालिसिस –
गरजना आपकी ‘कमजोरी’ है : यदि आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से सहमत हैं तो आपने जोर से बोलने, चिल्लाने को अपनी कमजोरी बना लिया है। इससे आपको नुकसान हो रहा है। सोचिए आपके कितने काम बिना ऐसा किए बन जाते हैं। सामान्य व्यवहार करना व मौन रहना सीखें।

बोलने का संयम आपकी ‘शक्ति’ है : यदि 7 या उससे से ज्यादा सवालों से असहमत हैं तो आपने बोलने पर लगाम लगा रखी है। यही आपकी शक्ति है। आपको चिल्लाने या गरजने की जरूरत केवल तभी पड़ती है जब कोई सही को गलत करता है। दूसरों को भी खासकर बच्चों को भी सिखाएं कि धीमे और अच्छा बोलने के फायदे हजार हैं।



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